अरेस्टेड लैंडिंग पास कर LCA Tejas ने रच दिया इतिहास

रायपुर।नौसेना एविएशन और DRDO  के लिए बीता शुक्रवार बेहद खास रहा| गोवा में समुद्र किनारे स्थित आईएनएस हंसा (INS Hansa) पर सबसे पहला तेजस (Tejas) एलसीए (नेवी) का अरेस्टेड लैंडिंग किया गया ,इससे पहले ऐसा लैंडिंग केवल अमेरिका, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और चीन के नेवी ने ही कर पाया था| अब इस कड़ी में भारत का नाम भी शुमार हो गया है|इस लैंडिंग के बाद तेजस अब भारतीय नौसेना विमानवाहक, आईएनएस विक्रमादित्य पर उड़ान के दौरान लैंडिंग करके दिखाना होगा।

आईएनएस हंसा पर सफल अरेस्टेड  लैंडिंग के बाद पायलट और क्रू में उत्साह

तेजस देश का पहला  एयरक्राफ्ट  जिसने अरेस्टेड लैंडिंग  की। 

अमेरिका, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और चीन के बाद  भारत  6वां  देश बना। 

क्या होती  है अरेस्टेड  लैंडिंग 

यह सामान्य लैंडिंग से अलग होती है। सामान्य रूप से  एक फाइटर एयरक्राफ्ट को 1 km लम्बे रनवे की जरुरत होती है लेकिन नौसेना में इन लड़ाकू विमानों को यह काम युद्धपोत पर करना होता है जिसमे लड़ाकू विमानों को टेक ऑफ के लिए 200 मीटर और लैंडिग 100 मीटर के रनवे पर उतरना होता  है। युद्धपोत  पर उतरने के लिये इन लड़ाकू विमानों  को जल्दी स्पीड कम करते हुए रुकना होता है ,इसी समय काम आती है अरेस्टेड लैंडिग।

जानिए काम कैसे करती है यह तकनीक

लड़ाकू विमानों को युद्धपोत पर लैंडिग कराने के लिए  एक खास  तरह की वायर प्रयोग में ली जाती है जिसे अरेस्टर वायर कहा जाता है। लैंडिंग के लिए लड़ाकू विमानों के पीछे मज़बूत स्टील के वायर से जोड़कर एक हुक लगाया जाता है ,इसे ही अरेस्टर वायर कहते है।

विमानों के पीछे मज़बूत स्टील के वायर से जोड़कर लगा हुक

लैंडिग के समय पायलट युद्धपोत में लगे दूसरे केबल में फ़सानी होती है,जैसे ही लैंडिंग होती है लड़ाकू विमानों को ये हुक केबल  की मदद से थोड़ी दूर पर रोक लेती है।

युद्धपोत में लगे केबल

तेजस ने अरेस्टेड लैंडिग लैंडिग के दौरान  244 kmph  से  0 kmph  पर आने के लिए सिर्फ 2 सेकंड लगाए।

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