सही-सलामत है विक्रम लैंडर : इसरो

दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार को साफ़ किया कि चंद्रमा पर उतरने से ठीक पहले लैंडर विक्रम से संपर्क जरूर टूटा है लेकिन उसमें कोई टूट-फूट नहीं हुई है। अभी भी लैंडर विक्रम से संपर्क करने की कोशिशें की जा रही हैं। इसरो ने बताया कि ऑर्बिटर ने एक तस्वीर भेजी है जिसके अनुसार लैंडर विक्रम एक ही टुकड़े के रूप में दिखाई दे रहा है।चंद्रमा पर लैंडिंग के दौरान 07 की रात में चंद्रमा की सतह से केवल 2.1 किमी ऊपर लैंडर विक्रम रास्ता भटककर अपने निर्धारित जगह से लगभग 500 मीटर की दूरी पर चंद्रमा की सतह से टकरा गया था जिसके बाद से इसरो का संपर्क टूट गया था। चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने रविवार को लैंडर विक्रम की थर्मल इमेज इसरो को भेजी थी। इसरो वैज्ञानिकों के मुताबिक़ लैंडर विक्रम एक तरफ झुका दिखाई दे रहा है, ऐसे में कम्युनिकेशन लिंक वापस जोड़ने के लिए लैंडर का ऐंटीना ऑर्बिटर या ग्राउंड स्टेशन की दिशा में करना बेहद जरूरी है।

उल्टा पड़ा होने की वजह से संपर्क करने में हो रही है दिक्कत: इसरो

लैंडर के चंद्रमा की सतह पर गिरने से उसका एंटीना दब गया है। इसलिए इसरो की टीम को संपर्क स्थापित करने में कठिनाई हो रही है। अगर कोशिशें रंग लाई तो विक्रम से संपर्क स्थापित होने पर वह दोबारा अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है। विक्रम में ऑबोर्ड कम्प्यूटर सिस्टम लगा होने से कमांड मिलने पर वह अपने थस्टर्स के जरिए अपने पैरों पर दोबारा खड़ा हो सकता है। इसके लिए इसरो टीम इसरो टेलिमेट्री ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क में लगातार काम कर रही है।चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर में वह टेक्नोलॉजी मौजूद है कि लैंडर गिरने के बाद भी खुद को खड़ा कर सकता है, लेकिन उसके लिए जरूरी है कि उसके कम्युनिकेशन सिस्टम से संपर्क हो जाए और उसे कमांड रिसीव हो सके। हालांकि, इस काम के सफल होने की उम्मीदें सिर्फ 1 फीसदी ही है लेकिन इसरो वैज्ञानिकों का मानना है कि कम से कम एक प्रतिशत ही सही, लेकिन उम्मीद तो है।